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5 + Famous Suryakant Tripathi Nirala Poems In Hindi – बेस्ट निराला कविता

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 1896 ई. में पश्चिम बंगाल के महिषादल राज्य के मेदिनीपुर ग्राम में हुआ था।

नमस्कार मित्रो, कैसे है आप सभी आज हमने आप सभी के लिए कवी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला “Poem by Nirala” की शानदार वे कुछ लोकप्रिय कविताओं का संग्रह लाये है। हमारे भारत देश में ऐसे कई महान कवी हुए जैसे की हरिवंश राय बच्चन, मुंशी प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा वे सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ये सभी हिंदी साहित्य की जड़ माने जाते है। उन्हों में से एक निराला है। जो छायावादी कवी के रूप में प्रसिद्ध है। कवी सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ने अपने जीवन में कई महान उपन्यास, कहानिया, वे कविताये कई सर्वश्रेष्ठ रचनाये भी लिखी लेकिन इन्होके जीवन में उन्हें प्रिसिद्धि इन्होकी कविताओं के माध्यम से मिली जिससे इन्होने कई महान कवियों वे साहित्यकारों के ही नहीं दुनिया का भी दिल जीता।

आज हम इन्हे इन्होकी कहानियों वे कविताओं के माध्यम से याद करते है। ऐसे महान कवी छाए आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन इन्होकी लिखी महान वे प्रसिद्ध कविताये इस बात का जिन्दा सबूत है की ये आज भी हमारे दिलो में जिन्दा है। दोस्तों इसलिए आज हमने ऐसे महान छायावादी कवी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कुछ कविताये लाये है। हमे उम्मीद है की आपको इन्होकी कविताये पढ़कर जरूर आनंद आएगा। धन्यवाद।

Hindi Poem by Nirala – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की प्रमुख रचनाएं

Suryakant Tripathi Nirala Poem in Hindi – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता

मित्र के प्रति (suryakant tripathi nirala ki kavita)
कहते हो, ‘‘नीरस यह
बन्द करो गान-
कहाँ छन्द, कहाँ भाव,
कहाँ यहाँ प्राण ?
था सर प्राचीन सरस,
सारस-हँसों से हँस;
वारिज-वारिज में बस
रहा विवश प्यार;
जल-तरंग ध्वनि; कलकल
बजा तट-मृदंग सदल;
पैंगें भर पवन कुशल
गाती मल्लार।’’

SuryaKant Tripathi Nirala poems in Hindi

करती विश्राम, कहीं
नहीं मिला स्थान,
अन्ध-प्रगति बन्ध किया
सिन्धु को प्रयाण;
उठा उच्च ऊर्मि-भंग-
सहसा शत-शत तरंग,
क्षुब्ध, लुब्ध, नील-अंग-
अवगाहन-स्नान,
किया वहाँ भी दुर्दम
देख तरी विघ्न विषम,
उलट दिया अर्थागम
बनकर तूफान।

Poems by Nirala – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की छोटी कविता

अभी न होगा मेरा अन्त
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसन्त
अभी न होगा मेरा अन्त

हरे-हरे ये पात
डालियाँ, कलियाँ कोमल गात

मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर

पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं
अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं

द्वार दिखा दूँगा फिर उनको
है मेरे वे जहाँ अनन्त
अभी न होगा मेरा अन्त

मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण
इसमें कहाँ मृत्यु
है जीवन ही जीवन
अभी पड़ा है आगे सारा यौवन
स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे
बालक-मन

मेरे ही अविकसित राग से
विकसित होगा बन्धु, दिगन्त
अभी न होगा मेरा अन्त

Famous Suryakant Tripathi Nirala poems

गीत गाने दो मुझे तो
वेदना को रोकने को

चोट खाकर राह चलते
होश के भी होश छूटे
हाथ जो पाथेय थे, ठग
ठाकुरों ने रात लूटे
कंठ रूकता जा रहा है
आ रहा है काल देखो

भर गया है ज़हर से
संसार जैसे हार खाकर
देखते हैं लोग लोगों को
सही परिचय न पाकर
बुझ गई है लौ पृथा की
जल उठो फिर सींचने को

Famous Suryakant Tripathi Nirala poems

सच है – Famous Suryakant Tripathi Nirala poem
यह सच है

तुमने जो दिया दान दान वह
हिन्दी के हित का अभिमान वह
जनता का जन-ताका ज्ञान वह
सच्चा कल्याण वह अथच है
यह सच है

बार बार हार हार मैं गया
खोजा जो हार क्षार में नया
उड़ी धूल, तन सारा भर गया
नहीं फूल, जीवन अविकच है
यह सच है – Poem by Nirala

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मित्रो आप सभी को हमारी पोस्ट Poem by Nirala पर कवी निराला की बेस्ट पोएम का ये शानदार कलेक्शन पर केसा लगा। मुझे उम्मीद है की आप सभी को हमारे माध्यम से लिखी ये फेमस कविताये पढ़कर जरूर मजा आया होगा। और हां आप हमे कमेंट में बताना न भूले की आपको हमारा ब्लॉग पोस्ट पर मजा आया या नहीं। हम ऐसे ही आप सभी के लिए तरह तरह की पोस्ट लाते रहेंगे। धन्यवाद।

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