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Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi || 5+ कवी हरिवंशराय बच्चन की सर्वश्रेष्ठ कविताये

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi:- नमस्कार दोस्तों आज हमने हरिवंशराय बच्चन की कविताओं पर आर्टिकल लिखा है। आजके हमारे लेख में कवी हरिवंश राय बच्चन की कुछ महान वे प्रसिद्ध कविताओं के बारे में आपको बताया जायेगा। आप सभी जानते है और बचपन से किताबो में पढ़ते भी आ रहे है की कवी हरिवंश राय एक हिंदी साहित्य के महान कवियों में से एक रहे है। इन्होने अपनी कविताओं के माध्यम से अपनी प्रिसिद्धि लोगो के आगे लाये और एक छायावादी कवी के रूप में उभरे। इन्होने अपनी कविताओं से अनेको पुरुस्कार भी जीते। वे हिंदी साहित्य में इन्होका काफी बड़ा हाथ माना जाता है। वैसे इससे पहले हमने Sarojini Naidu Poems in Hindi पर लेख लिखा था आप देख सके है। धन्यवाद। 

हरिवंशराय बच्चन जीवन परिचय – हरिवंश राय बच्चन (27 नवम्बर 1907 – 18 जनवरी 2003) हिंदी भाषा के एक कवि और लेखक थे। वे हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। ये एक उत्तर छायावादी कवी भी थे जिन्होंने अपनी कला से लोगो को घायल कर रखा था। इनकी ऐसी काफी कविताये वे रचनाये है जो काफी प्रसिद्ध हुई जिसमे से कुछ ख़ास है जैसे :- मधुशाला वे अग्निपथ कविता काफी प्रसिद्ध हुई। तो आइये हमारी पोस्ट में इन्होकी कुछ दिल छू लेने वाली कविताओं के बारे में जानते है।

Poems on Harivansh Rai Bachchan in Hindi – हरिवंश राय बच्चन की कविता 

harivansh rai bachchan famous poems in hindi

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

वह उठी आँधी कि नभ में
छा गया सहसा अँधेरा,
धूलि धूसर बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा,

रात-सा दिन हो गया, फिर
रात आ‌ई और काली,
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा,

रात के उत्पात-भय से
भीत जन-जन, भीत कण-कण
किंतु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

वह चले झोंके कि काँपे
भीम कायावान भूधर,
जड़ समेत उखड़-पुखड़कर
गिर पड़े, टूटे विटप वर,

हाय, तिनकों से विनिर्मित
घोंसलो पर क्या न बीती,
डगमगा‌ए जबकि कंकड़,
ईंट, पत्थर के महल-घर

बोल आशा के विहंगम,
किस जगह पर तू छिपा था,
जो गगन पर चढ़ उठाता
गर्व से निज तान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

क्रुद्ध नभ के वज्र दंतों
में उषा है मुसकराती,
घोर गर्जनमय गगन के
कंठ में खग पंक्ति गाती;

एक चिड़िया चोंच में तिनका
लि‌ए जो जा रही है,
वह सहज में ही पवन
उंचास को नीचा दिखाती

नाश के दुख से कभी
दबता नहीं निर्माण का सुख
प्रलय की निस्तब्धता से
सृष्टि का नव गान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

Harivansh rai Bachchan poetry in Hindi | •• अग्निपथ कविता ••

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

Harivansh rai Bachchan poems in Hindi pdf – हरिवंश राय बच्चन हिंदी में कविता

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु स्वेद रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

Harivansh rai Bachchan ki Kavita 

तट पर है तरुवर एकाकी,
नौका है, सागर में,
अंतरिक्ष में खग एकाकी,
तारा है, अंबर में,भू पर वन, वारिधि पर बेड़े,
नभ में उडु खग मेला,
नर नारी से भरे जगत में
कवि का हृदय अकेला


यह भी पढ़े –

हां तो दोस्तों हमारा आजका लेख Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi” पर पढ़ कर केसा लगा। आजकी हमारी पोस्ट का यही उदेश्य था की आप भी इन महान हिंदी साहित्य कवी के बारे में जाने और इन्होकी कविताये पढ़े। अगर आपको हमारी पोस्ट से लेकर कोई सवाल जवाब है तो आप हमसे कमेंट बॉक्स में पूछ सके है।धन्यवाद। 

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