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Poems on Nature in Hindi || प्रकर्ति पर कुछ सुन्दर कविताये

Poems on Nature in Hindi:- दोस्तों आज एक बार फिर हिंदी फॅमिली पर आप सभी का स्वागत है। मित्रो आज हमने आप सभी के लिए प्रकर्ति पर कुछ लोकप्रिय कविताओं का एक शानदार संग्रह शेयर करने जा रहे है। मित्रो आज हम जो भी है जैसे भी है। सब प्रकर्ति की दें है। सदियों से लेकर अब तक प्रकर्ति का ये घटनाक्रम जैसे सूर्य का उगना वे शाम को ढल जाना, रात्रि में चाँद की वो रौशनी, पेड़ पौधे ताजा हवाएं ये सभी प्रकर्ति वे भगवन की दें है। आप मनुष्य अपनी ज़िंदगी की भाग दौड़ में प्रकर्ति की सुरक्षा करना खाई भूल सा गया है। इसलिए आज हम आप सभी के साथ नेचर कविताये हिंदी में लाये है ताकि आप अपने जीवन में प्रकर्ति के महत्व को समझ सके। मित्रो प्रकर्ति ने हमेशा से ही हमको कुछ न कुछ दिया है। इसलिए हमारा भी फर्ज बनता है की हम प्रकर्ति की रक्षा करने का जिम्मा उठाये। तो आइये आपका कीमती समय बर्बाद किये बिना हम हमारी पोस्ट Poems on Nature की और चलते है।

poems in nature in hindi – प्रकृति को बचाने पर कविता

poems on beauty of nature in hindi – प्रकृति से खिलवाड़ पर कविता

कलयुग में अपराध का

बढ़ा अब इतना प्रकोप

आज फिर से काँप उठी

देखो धरती माता की कोख!!

समय समय पर प्रकृति

देती रही कोई न कोई चोट

लालच में इतना अँधा हुआ

मानव को नही रहा कोई खौफ!!

कही बाढ़, कही पर सूखा

कभी महामारी का प्रकोप

यदा कदा धरती हिलती

फिर भूकम्प से मरते बे मौत!!

मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे

चढ़ गए भेट राजनितिक के लोभ

वन सम्पदा, नदी पहाड़, झरने

इनको मिटा रहा इंसान हर रोज!!

सबको अपनी चाह लगी है

नहीं रहा प्रकृति का अब शौक

“धर्म” करे जब बाते जनमानस की

दुनिया वालो को लगता है जोक!!

कलयुग में अपराध का

बढ़ा अब इतना प्रकोप

आज फिर से काँप उठी

देखो धरती माता की कोख!!

poem on nature in hindi by harivansh rai bachchan

ह्बायों के रुख से लगता है कि रुखसत हो जाएगी बरसात

बेदर्द समां बदलेगा और आँखों से थम जाएगी बरसात .

अब जब थम गयी हैं बरसात तो किसान तरसा पानी को

बो वैठा हैं इसी आस मे कि अब कब आएगी बरसात .

दिल की बगिया को इस मोसम से कोई नहीं रही आस

आजाओ तुम इस बे रूखे मोसम में बन के बरसात .

चांदनी चादर बन ढक लेती हैं जब गलतफेहमियां हर रात

तब सुबह नई किरणों से फिर होती हें खुसिओं की बरसात .

सुबह की पहली किरण जब छू लेती हें तेरी बंद पलकें

चारों तरफ कलिओं से तेरी खुशबू की हो जाती बरसात .

नहा धो कर चमक जाती हर चोटी धोलाधार की

जब पश्चिम से बादल गरजते चमकते बनते बरसात

Best Poem on Nature in Hindi

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें,

भूमि मेरी माता है,

और पृथ्वी का मैं पुत्र हूं।

मैदान, झीलें, नदियां, पहाड़, समुंद्र,

सब मेरे भाई-बहन है,

इनकी रक्षा ही मेरा पहला धर्म है।

अब होगी अति तो हम ना सहन करेंगे,

खनन-हनन व पॉलीथिन को अब दूर करेंगे,

प्रकृति का अब हम ख्याल रखेंगे।

हम सबका जीवन है सीमित,

आओ सब मिलकर जीवन में उमंग भरे,

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

प्रकृति से हम है प्रकृति हमसे नहीं,

सब कुछ इसमें ही बसता,

इसके बिना सब कुछ मिट जाता।

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

short poem on nature –  प्रकृति और मानव पर कविता

हरी डाल पर लगी हुई थी,
नन्हीं सुंदर एक कली।
तितली उससे आकर बोली,
तुम लगती हो बड़ी भली।
अब जागों तुम आँखें खोलो,
और हमारे संग खेलो।
फैले सुंदर महक तुम्हारी,
महके सारी गली-गली।
कली छिटककर खिली रंगीली,
तुरंत खेल की सुनकर बात।
साथ हवा के लगी भागने,
तितली छूने उसे चली।

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मित्रो आपको हमारा लिखा ब्लॉग कंटेंट Poems on Nature in Hindi पर प्रकर्ति कविताएं पढ़कर बेशक मजा आया होगा। दोस्तों आप ये सभी कविताएं अपने दोस्तों वे अपनी प्रेमिका के साथ इस बारिश भरे सुहाने मौसम में शेयर कर सकते है। और हां आप हमे कमेंट में जरूर बताये की आपको हमारी कोनसी नेचर कविता पढ़कर मजा आया। धन्यवाद।

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