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Labor Day Poem in Hindi || मजदुर पर 30+ सर्वश्रेष्ठ कविताये

दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है की प्रत्येक वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. इसकी शुरुआत 1 मई 1886 में अमेरिका के एक आन्दोलन से हुई थी इस आंदोलन की शुरुआत एक ख़ास मकसद के लिए हुई. ये मकसद जानने से पहले हम आप सभी को ये बता देते है की आज हमने आप सभी के लिए Labor Day Poem पर जो आर्टिकल लिखा है आप इसे जरूर पढ़े ताकि आप भी हमारे माध्यम से लिखी इस पोस्ट का मतलब वे उदेश्य जान सके।

हमने Mazdoor Diwas in Hindi पर ये कविताये इसलिए लिखी है ताकि आज हमारे देश में जो मजदूरों का शोषण हो रहा है अर्थात जरुरत से ज्यादा समय उन्हो से कार्य करवाया जा रहा है। इस कार्य की अवधि को कम करके 8 घंटे हो इसलिए हमने आज मजदुर दिवस पर कुछ रोचक वे लोकप्रिय कविताएं लिखी है ताकि दुनिया ये कविताओं के माध्यम से जागरूक हो और गरीब मजदुर के लिए कदम उठाये। तो आइये जानते है मजदुर दिवस पोएम इन हिंदी में जिसे आप अपने सभी मजदुर भाइयो को मजदुर दिवस पाए शेयर कर सकते है।

Labor Day Poem in Hindi – मजदुर दिवस पर कविता

Majdur Diwas Pr kavita – मजदुर दिवस कविता इन हिंदी

पत्थर तोड़ रहा मजदूर
पत्थर तोड़ रहा मजदूर
थक के मेहनत से है चूर
फिर भी करता जाता काम
श्रम की महिमा है मशहूर

मेहनत से न पीछे रहता
कभी काम से न ये डरता
पर्बत काट बनाता राह
नव निर्माण श्रमिक है करता

नदियों पर ये बांध बनाता
रेल पटरियां यही बिछाता
श्रम की शक्ति से मजदूर
कल कारखाने भवन बनाता

खेत में करता मेहनत पूरी
पाता है किसान मजदूरी
कतराता जो भी है श्रम से
उसे घेरती है मज़बूरी

labor day poems hindi

दुनिया जगर-मगर है कि मज़दूर दिवस है
चर्चा इधर-उधर है कि मज़दूर दिवस है

मालिक तो फ़ायदे की क़वायद में लगे हैं
उन पर नहीं असर है कि मज़दूर दिवस है

ऐलान तो हुआ था कि घर इनको मिलेंगे
अब भी अगर-मगर है कि मज़दूर दिवस है

साधन नहीं है कोई भी, भरने हैं कई पेट
इक टोकरी है, सर है कि मज़दूर दिवस है

हाथों में फावड़े हैं ‘यती’ रोज़ की तरह
उनको कहाँ ख़बर है कि मज़दूर दिवस है

poem for labour day

“मैं एक मजदूर हूँ”

मैं एक मजदूर हूँ, ईश्वर की आंखों से मैं दूर हूँ।
छत खुला आकाश है, हो रहा वज्रपात है।
फिर भी नित दिन मैं, गाता राम धुन हूं।
गुरु हथौड़ा हाथ में, कर रहा प्रहार है।
सामने पड़ा हुआ, बच्चा कराह रहा है।
फिर भी अपने में मगन, कर्म में तल्लीन हूँ।
मैं एक मजदूर हूँ, भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ।
आत्मसंतोष को मैंने, जीवन का लक्ष्य बनाया।
चिथड़े-फटे कपड़ों में, सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को, सुख-दुख का संगीत है।
मैं एक मजदूर हूँ, भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ।

Labour Day Poem – Poems on Labor Day

“जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा”

जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
जिसने पसीने से भूमि को सींचा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
वह किसी का गुलाम नहीं
अपने दम पर जीता हैं।
सफलता एक एक कण ही सही
लेकिन है अनमोल जो मज़दूर कहलाता हैं।

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में आशा करता हूँ की आप सभी को हमारे माध्यम से लिखी Labor Day Poem पर मजदुर कविताये पढ़कर वेशक आनंद आया होगा। और आप हमारी पोस्ती का उदेश्य भी समझ गए होंगे। अगर हमारे आर्टिकल से सम्बंधित तुम्हारा कोई सवाल है आप हमसे कमेंट में पूछ सकते है। धन्यवाद।

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